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Sad poem in Hindi|कोई तो इन्हें जगा दो

हे सुनो उठो देखो सब आए हैं,

भीड़ लगी द्वारे पर अपने,

सब तुम्हारी आस लगाए हैं।


फूट-फूटकर रो रहे बापू जी,

ननदो की आंखें लाल भाई हैं,

कब से एक टक देख रही अम्मा जी,

बैठी अकेली दुख के नीर सहेज रही हैं।


हे कोयल तुम कहां छुपी हो,

सुबह हो गई दिन चढ़ गए हैं,

शायद तुम्हारी आवाज के खातिर,

अभी तलक ये सोए हुए हैं।


हे कागा अब तुम ही जगा दो,

छत पर जाकर आवाज लगा दो,

उन्हें पता चले कि सुबह हुई है,

इसीलिए यह बांग हुई है।


शायद तुम नाराज हो मुझसे,

कल की सारी बातों से,

जिद करके मैं रोक रही थी,

तुम को बाहर जाने से।


सफेद रंग पसंद नहीं था तुमको,

फिर क्यों इसमें लपिटाए हुए हो,

इतनी लकड़ियां क्यों आ रही घर पर,

क्यों मुझको भरमाए हुए हो।


क्या तुम्हें बिल्कुल फिक्र नहीं है मेरी,

जो गहरी नींद में सो गए हो,

देखो बाबूजी क्या कह रहे मुझसे,

तुम मुझे छोड़ कर चले गए हो।

Sad poem in Hindi
Sad poem in Hindi

चर्चा:-

उपरोक्त पंक्तियों में बहुत ही गहरा दुख व्यक्त किया गया है। एक नवविवाहित स्त्री के वियोग का वर्णन किया गया है। इन पंक्तियों में उसके अंदर का दुख शब्दों के माध्यम से देखा जा सकता है ।

उपरोक्त पंक्तियों में स्त्री अपने पति की मृत्यु को स्वीकार नहीं कर पा रही है वह विभिन्न प्रकार के प्राणियों से विनती कर रही है कि वे मेरे पति को निद्रा से जगा दें। उस अभागी स्त्री को यह लग रहा है कि उसका पति अभी सो रहा है।

वह अपने ननंद ससुर एवं सास को रोते हुए देख कर विचलित है की यह लोग आखिरकार रो क्यों रहे हैं मेरे पति तो अभी निद्रा में है।
उस स्त्री को इस बात का पूर्ण ज्ञान है कि उसका पति अब जीवित नहीं है परंतु उसकी मृत्यु को स्वीकार कर पाना उसकी सहनशक्ति से बाहर था क्योंकि अभी वह नवविवाहित जुड थे।

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